नामकरण और उसका महत्त्व :
ऐसा माना जाता है कि मूल मंदिर सत युग में चंद्र या सोम देव भगवान द्वारा सोने के साथ बनाया गया था. त्रेता युग में रावण द्वारा चांदी में बनाया गया था. और द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण द्वारा चंदन से बनाया गया था. सोमनाथ मंदिर को विभिन्न मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा कई बार (करीब 17) लूटा और ध्वस्त किया गया है. – अल जुनैद, गजनी के महमूद (1024), अफजल खान, अला-उद-दीन खिलजी (1296), मुजफ्फर शाह (1375), महमूद बेगड़ा (1451) और बाद में औरंगजेब द्वारा (1665).
सोमनाथ मंदिर की कथा (कहानी)
इस मंदिर का नाम सोमनाथ कैसे पड़ा. इसके पीछे एक बहुत प्रचलित कथा है. जो कि, इस प्रकार है. ऐसा माना जाता है कि, चंद्र देव का विवाह प्रजापति दक्ष की 27 पुत्रियों से हुआ था. उन सभी पुत्रियों में चन्द्र देव को रोहिणी से अत्यधिक प्रेम था. इस बात से बाकि कन्याएं उनसे नाराज हुई और यह बात अपने पिता दक्ष प्रजापति को बताई.
इससे प्रजापति नाराज हो गए. उन्होंने चन्द्र देव को चेतावनी देते हुए कहा कि, वह अपने प्यार में निष्पक्ष रहें. जब चंद्र ने उनकी चेतावनियों पर ध्यान नहीं दिया, तो प्रजापति ने उन्हें शाप दिया कि, दिन ब दिन तुम्हारी चांदनी घट जाएगी. और यही हुआ. चन्द्र की चांदनी के बिना दुनिया अँधेरी हो गई. इसलिए सभी देवताओं ने प्रजापति से अपना श्राप वापस लेने का अनुरोध किया. दक्ष ने सुझाव दिया कि, चंद्र देव भगवान शिव से प्रार्थना करें.
उसके बाद चन्द्र देव यानी सोम देव ने भगवान शिव से प्रार्थना की. भगवान शिव भोलेनाथ, सोमदेव की तपस्या से प्रसन्न हुए. और उनको उस श्राप से मुक्त कर दिया. यही कारण है कि, भगवान को सोमनाथ या सोमेश्वर, चंद्रमा के भगवान के रूप में जाना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि, चंद्र ने अपनी चमक वापस पाने के लिए सरस्वती नदी में स्नान भी किया था, जो इस समुद्र तट के स्थान पर चंद्रमा और ज्वार भाता घटने का कारण है।
और इस तरह चन्द्रमा ने अपने प्रभास (प्रतिभा) को पुनः प्राप्त किया। इसलिए इस शहर का नाम प्रभास रखा गया, जिसका अर्थ चमक होता है। वैकल्पिक नाम सोमेश्वर और सोमनाथ (“चंद्रमा के स्वामी” या “चंद्र देवता”) इस परंपरा से उत्पन्न हुए हैं ।
स्कंद पुराण के एक अध्याय, प्रभास खंड में इस मंदिर का उल्लेख मिलता है. इसका उल्लेख ऋग्वेद और भागवत में भी मिलता है.
अन्य कथा कहानी
एक अन्य कथा, सोमनाथ मंदिर (somnath temple) से जुडी, इस प्रकार है- एक बार की बात है. भगवान श्री कृष्ण एक बगीचे में विश्राम कर रहे थे. तभी एक शिकारी ने उनके पाँव पर लगे पद्म चिह्न को यह समझकर तीर मार दिया कि, यह कोई हिरन की आँख है. तब भगवान श्री कृष्ण ने इसी स्थान पर अपने प्राण त्याग दिए थे. इस कथा के अनुसार, यह स्थल और भी पवित्र माना जाता है.
ज्योतिर्लिंग
कई हिंदू ग्रंथ और पौराणिक कथाओं के आधार पर पवित्र शिव तीर्थ स्थलों की एक सूची मिलती है जिसके अनुसार सोमनाथ मंदिर ज्ञानसंहिता में ज्योतिर्लिंगों की सूची में सबसे ऊपर है । सभी या तो सीधे तौर पर सोमनाथ मंदिर को बारह स्थलों में से एक के रूप में उल्लेख करते हैं, या शीर्ष मंदिर को ” कहते हैं। करते हैं।
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